शब्-ए-याद

आज शब – ए – याद में ए दिल कोई बहल नहीं .
सबा में वो लहर नहीं , जुबां पे वो ग़ज़ल नहीं .

इंतज़ार -ओ -दिलबर में बसर है , असर नहीं ,
उनपे ऐतबार कहाँ ? वोह आज हैं , वोह कल नहीं .

फ़िराक-ए -फ़ुरक़त में आँखें बंद थी बा -शब मगर ,
पलकों तले तूफ़ान है , चैन -ए -असल नहीं .

जी हाँ मिला था हमें आपका वोह दिल -फरेब ख़त
वोह लफ्ज़ मरहम-ए-दर्द -ए -दिल हैं, मर्ज़ -ए -इश्क का हल नहीं .

हरगिज़ हर शौक़ को अंजाम देंगी वोह , मैं हूँ या हूँ नहीं ,
ग़ैरों में भी वोह ढूँढती है तुझे , दिल -ए -नादाँ तू जल नहीं.

चले गए वोह नाक़द्र आशिक , ज़ंजीर-ए-फ़र्ज़ में क़ैद
अपनी दिलबरी में हर फासला फना! दिल-ए-मायूस तू मचल नहीं!

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