सुनो सुनो सुनो ! आज कुछ खरा सुनाता हूँ !

Me reading this aloud:

सुनो सुनो सुनो !
आज कुछ खरा सुनाता हूँ !

कहानी ये बिलकुल सच्ची है
और सुनने में भी अच्छी है
तो कान खोलना मुफ़्त मानो,
और ध्यान इस बात पे बांधो –

ये दुनिया अब हमारी नहीं रही!
कहते हैं इंसान बड़ा बुद्धिमान है
और ये कहने वाले भी इंसान हैं
तो बात तो सच्ची होगी ही? क्यों?
फिर सवाल मैं ये उठाता हूँ  –
के जब मैं बाज़ार जाता हूँ
तो देखता हूँ सब बईमान हैं
और तुम कहते हो इंसान बुद्धिमान है!

ये दुनिया अब हम नहीं चलाते मेरे यार
चलाने वाले को मैंने देखा है
उसे छुआ है, महसूस किया है
मजबूरी में उसे याद किया है
अमीरी में उस से राज किया है

हाँ हाँ ! मैंने उसे देखा है !

तो सुनो सुनो सुनो!
आज कुछ खरा सुनाता हूँ !
सरकारें, राजा, भगवान सब त्याग कर
मैं बस अब बस पैसे को सलाम लगाता हूँ !

तेरी मेरी अहमियत अब कीमत बन चुकी है
तभी दहेज़ के  डर से बेटियां जीवनभर रोती हैं
और शादी के रिश्ते सिर्फ तब आते हैं
जब हम अपना ज़मीर नहीं, अपनी पगार बताते हैं

छोटे छोटे बच्चों के बड़े-बड़े सपनों को हम
तन्ख़्वा के तराज़ू से तोलते हैं
और सूट बूट पहने चोरों को
अब हम “बड़े साहब” बोलते हैं

क्योंकि अब कायदे कानून, जज़्बात-ओ-जूनून
सब बिक गए! सब बिक गए!
और जिसके नोटों के ढेर ऊंचे थे
वो कुर्सियों पे टिक गए!

मानते हो के बात खरी है
तो थोड़ा सर तो हिलाओ!
और जो बात झूटी लगे तो
पहली अपनी जायदात बताओ

क्योंकि समाज में अब पैसे का कुछ अजीब ही धंधा है
जो गरीब है वो गूंगा है, जो अमीर है वो अँधा है

और बचा कौन? बचा कौन दोस्तों?
बचा वो जो गरीब था
पर अभी अभी तो उसकी नौकरी लगी है
अभी अभी  घर पे
दो वक़्त की रोटी आने लगी है
अभी अभी कुछ क़र्ज़े उठने लगे हैं
अभी अभी तो वो बेड़ियां हटने लगी हैं
अभी अभी उसने माँ को नयी गाडी में घुमाया
अभी अभी तो उसने दादाजी का ऑपरेशन करवाया
अभी अभी तो उसने अपनी पहली छुट्टी ली है
अभी अभी तो उसमे दुनिया देखने की हसरतें जगी हैं
अभी अभी तो वो ज़िल्लत की बू को भूल पाया है
अभी अभी तो उसने अपना पहला घर बनाया है
और उसके इस नए बसेरे के लिए
किसने किस बस्ती को जलाया है
इस सवाल को अपने नए टीवी के चकाचौंध में
वो अभी अभी तो भूल पाया है

सुनो सुनो सुनो!
हमारी दुनिया एक सीढ़ी है –
जो नीचे वो पैरों की धुल है
और तू सोचता है ऊपर कैसा होगा
बस यही तो अंधे तेरी भूल है –
याद  रख –
सबसे ऊपर खुद पैसा होगा ।
तो करी जा तू भी संघर्ष मेरे दोस्त
तू भी कमा और तू भी लुटा
ऊपर वालों की चाट
और नीचे वालों को चटा

क्योंकि छल, कपट, झूठ, ग़द्दारी
सच,इंसाफ़, भाईचारा, और यारी
ये सभी अब बस किताबी बातें हैं
जो A.C. लगाए रहीस ही कर पाते हैं।

पर A.C. किसे नहीं चाहिए मेरे दोस्त?
वो बंगला, वो गाड़ी, वो शोहरत, वो आराम
सुकूँ भरे दिन, अयाशियों भरी शाम
हा! खुद को देख मेरी जान
बस यही तो वो नशा है जिसमे खो गया इंसान।
ये सपने, ये अरमान
सब पैसे-वालों की बदमाशी है
वर्ना तेरे-मेरे लिए तो
दो वक़्त की रोटी भी काफ़ी है
और हम जैसे नशेड़ियों से बेहतर तो वो है
जिसके घर में ना TV, ना रेडियो-अखबार है
तू देख, आँखें खोल
दुनिया सपनों का बाज़ार  है
तेरी आँखों में जो चमक है वो
किसी और का कारोबार है

तो खरीद मेरी जान खरीद !
और खरीद-पाने के लिए
घसीट मेरी जान घसीट!
office से दूकान तक की दूरी
बस छे मिनट में पूरी कर पाएगा
कुछ मज़ेदार-सा खरीदने के हक़ के बदले
तू अपनी इंसानियत बेच आएगा।

सुनो सुनो सुनो – मैं बात खरी सुनाता हूँ !
जो जैसा है, वो वैसा ही बताता हूँ
इस रोटी कपड़े मकान के पीछे
ना जाने कितने शहीद हुए
कितने संत गरीब रहे
और कितने क़ातिल अमीर हुए

पर मौका है! अब भी मौका है तेरे पास!
हिम्मत हो तो सुन
अपनी आँखें बंद कर
और अपने सपने खुद बन
पैसे नहीं दोस्त कमाने की सोच
गाड़ी नहीं, रिश्ते चलाने की सोच!
अरे मैं कहता हूँ इस पैसे को जाने दो!
हमें लड़ने के नहीं, साथ रहने के बहाने दो
क्योंकि जीने के लिए मुझे
ना रोटी, ना कपड़ा, ना मकान चाहिए
मुझे तो बस इंसान चाहिए
मुझे तो बस इंसान चाहिए

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