सुनो सुनो सुनो ! आज कुछ खरा सुनाता हूँ !

Me reading this aloud: सुनो सुनो सुनो ! आज कुछ खरा सुनाता हूँ ! कहानी ये बिलकुल सच्ची है और सुनने में भी अच्छी है तो कान खोलना मुफ़्त मानो, और ध्यान इस बात पे बांधो –

Rahi Tham Jaa Zara

डगमगा रहे कदम दिल की धड़कनें भी यूँ है समा भी झूम रहा सर है भारी सा कभी पैरों में जहाँ कभी कुछ समझ नहीं आ रहा … दो ही पल का साथ है सीधी सीधी बात है रोक ले ज़रा यहीं कदम । राही थम जा ज़रा वक़्त है यहाँ बड़ा देरी ही तो हैContinue reading “Rahi Tham Jaa Zara”

Budhaape Tu Kab Aayega?

Uljhan hai jawaani, Dil fareb kahaani, Ye bachpan mein koi nahi bataayega. Itne saare loche, Gabru bhi soche, Budhaape tu kab aayega? Future kathor, Itihaas se bore, par Aaj? Aaj tu James Bond hai! Aajaata hun on the beach, Par photo na hi kheench… Tshirt ke neeche tond hai. Aish ki planning, aur Plan ki bashingContinue reading “Budhaape Tu Kab Aayega?”

बस इक पल के लिए

थम जाए अगर ये दुनिया बस इक पल के लिए, थोड़ा सा चैन छीन लूँ बस इक पल के लिए। ज़िन्दगी का नाम रफ़्तार है ख़्वाबों का बाज़ार है खरीदे सपने बेच दूँ बस इक पल के लिए। चस्का है कुछ कर जाने का वादा-ए-तक़दीर निभाने का अपनी तक़दीर देख लूँ बस इक पल केContinue reading “बस इक पल के लिए”

Aaj Sab Theek Hai – New Song About Blaming it on the Ooparwaala

Here’s a little song I wrote, You might want to sing it note for note, Don’t worry, And blame it on, The ooparwaala. Lyrics Verse: Mandir ho ya Masjid, Church ya gurudwara, Ya phir sheesh mahal mein baitha Dashing boss tumhaara Ooparwaala hai har kaheen Aasmaan woh, hum zameen. Toh baadal kaheen bhi chhaayein BaarishContinue reading “Aaj Sab Theek Hai – New Song About Blaming it on the Ooparwaala”

Ye Dhun Gungunaana

Jab dhundhli ho raahein saari Ghadi ke kaante pad jaayein bhaari Jab mann aur manzil ke beech mein Aa jaaye duniyadaari Toh ye dhun gungunaana Chintaayein bhool jaana Yahi hai khushiyaan paane ka Ek aasaan bahaana. Asamanjas mein kyon padna, Jab aage hi hai badna Toh aaj nahi toh kal Niklega koi hal Bas tabContinue reading “Ye Dhun Gungunaana”

मुज्ज़फर्नगर के दंगे

टीवी पर न्यूज़ देखी तो दंग रह गये।  दरअसल जिन से हम मुहब्बत करते हैं उनका मुज़फ्फरनगर से तालुक़ है, तो ज़ाहिर है कि सबसे पेहले उन्ही को फ़ोन किया।

ख्व़ाब

ऊंचा इक पहाड़ खाई गहरी तेज़ हवाएं जलते ख़्वाबों की बू दूर एक ढलते सूरज से आँखों में धुआं नज़रें मदहोश कंप-कंपाते घुटने पसीने की अकेली टपकती बूँद बिजली सी छाती पर रेंगती दिल छोटा । मुरमुरा । मुंह खुला पर आवाज़ नहीं । जुबां पर कुच्छ मचलते अलफ़ाज़ पर आवाज़ नहीं । वोह खाईContinue reading “ख्व़ाब”

Tum Ho Ki

आराम से बैठे होते यार किसी छत पे, हुक्के लगाते घरवालों के दुखड़े सुनते, दुखड़ों को मरोड़के, चुटकुले घोलते, ग़ज़लें टटोलते, और तुम हो की साली भसड़ मचा रखी है? अरे! किसी बगीचे में पान चबाते, गुल्ले बेगियों की छाओं में धूप भुलाते, गर्मियां बिताते, किस्से सुनाते, चाय में इलायची भिगोते पकोड़ों पर सपने तलते फिर बंद आँखों सेContinue reading “Tum Ho Ki”

सूर्यास्त

ऊंचा इक पहाड़  खाई गहरी  तेज़ हवाएं  जलते ख़्वाबों की बू  दूर इक ढलते सूरज से  आँखों में धुआं  नज़रें नशीली  कांपते घुटने  पसीने की अकेली रेंगती बूँद  बिजली सी  छाती पे  दिल छोटा। मुरमुरा।  मुह खुला पर  आवाज़ नहीं।  जुबां पे कुच्छ मचलते लफ्ज़ पर  आवाज़ नहीं।  वो खाई गूँज उठती मगर  आवाज़ नहीं। तोहContinue reading “सूर्यास्त”

ज़िन्दगी लम्बी नहीं बड़ी हो

ज़िन्दगी लम्बी नहीं बड़ी हो हर पल सर पर मस्ती चढ़ी हो  कशमकश पे हँसे ये लब मेरे मौत भी आने डरी हो।    निंदिया अपने मन से उड़े  घड़ियों को सुइयां ना चुभानी पड़ें  दो कप छाए, थोड़ी ग़ैरों से बातें  अँधेरे की आढ़ में यारी बढ़े।   मंसूबों में आज डुबायें नहीं  पर पल भर मेंContinue reading “ज़िन्दगी लम्बी नहीं बड़ी हो”

ज़िन्दगी के packets के size मैं बदलाव

सोचो ज़रा के बचपन में और आज में हम में और समाज में अंतर क्या है? सोचो ज़रा पहले बेपरवाह कहलाते थे अब लापरवाह कहलाते हैं ये जंतर क्या है? भाई मैं तोह बदला नहीं. अब भी: पढ़ाई का डर, चीज़ें खोना, देर से उठना, ना ही उठना, सब बाकायदा बरकरार हैं फिर भी पहलेContinue reading “ज़िन्दगी के packets के size मैं बदलाव”