Galat fehmi – Naatak

स्कूल मैं हम दोनों एक दुसरे से कभी बात नहीं करते थे. आते जाते कभी कभी आँखें मिल जाती थी, और वो ऐसे देखती थी जैसे मैं कोई सांप हूँ. वैसे डस्ती तो वो थी आँखों से – क्या आँखें बनाती थी by god मन करता था वहीं जाके एक लगा दूं…  क्या आँखें बनाती थी. क्या आँखें थी…
मेरे बेस्ट फ्रेंड विकी का उसपे दिल आ गया. मैंने उसे बहुत समझाया के भैया ये अजीब-ओ-गरीब औरतों से बचके रह, पर वो था के रट लगा ली के इसी को पटाऊंगा. तो एक दोस्त होने के नाते, मैंने भी कहा ठीक है तू कर कोशिश, मैं तेरे साथ हूँ. पहली डेट से आकर बोला,”करन यार, उसे कवितायें पसंद हैं भाई, तू कुछ लिख के दे ना यार…” मैंने बहुत मना किया, पर फिर, दिल पे पत्थर रख के मैं उस हूर को छुप-छुप के देखने लगा, और ऐसी कवितायें लिखने लगा, ऐसी भावनाएं महसूस करने लगा, जिन्हें मैं सालों से दबाये बैठा था.
दुआ है के अब की बार तू इस कदर मिले,
यगाना मुक़द्दर मिले, सुहाना हमसफ़र मिले.
मैं सारा दिन उसी के बारे मैं सोचने लगा. उसके सपने आने लगे. वहाँ विकी उसके साथ और serious होता गया. मैं कवितायें लिखता गया, जो विकी के प्यार की बुनियाद बन गयी, और मेरे प्यार की चिता.
विकी और संजना की शादी हुए दस साल होने वाले हैं. वो आज भी मुझे ऐसे ही देखती है, उन दोष-देती आँखों से, जैसे मैंने उसके साथ कोई बड़ा अन्याय किया हो. आज तक मैं येही सोचता रहा के अपने दोस्त की प्रेम कहानी के बीच मैं नहीं आऊंगा; क्योंकि संजना के दिल मैं विकी के अलावा कोई नहीं. उनके इस प्यार के गीत मैं बस चद अलफ़ाज़ ही मेरे हैं… पर मैं गलत था.
कुच्छ दिन पहले विकी का फ़ोन आया. वो और संजना तलाक ले रहे हैं. मैं चौंक गया. वो फ़ोन पे ही रोने लगा. मैंने पूछा की आखिर हुआ क्या? विकी ने कहा,” वो तुझसे प्यार करती है, रजत.”
सोचता हूँ उसको दिननेर पे ले जाऊं कभी, दो चार अपने शेर अपने मुह से भी कह दूं…

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मेरी लाइफ परफेक्ट है, डॉक्टर साहिब. मेरी wife मुझसे बहुत प्यार करती है, हमारी बेटी दुनिया की सबसे प्यारी बच्ची है, और खुदा की रहमत से हम हर वो चीज़ afford कर सकते हैं जिसकी हमें ज़रुरत है… मुझे नहीं पता के मेरे mom-dad ने मुझे आपके पास क्यों भेजा है, पर, सच कहता हूँ डॉक्टर साहिब, I don’t need this treatment!

जी? जी हाँ, गए तो थे. पिछले महीने. July 1996. जी. क्या? अभी 2010 चल रहा है? हाहा! अच्छा मज़ाक कर लेते हैं आप डॉक्टर साहिब. सुनिए न, मैं बताता हूँ आपको. तो पिछले महीने हम मनाली गए थे, गर्मी से बचने का बेस्ट तरीका है… और सर क्या वादीयाँ!क्या मौसम! मैं, और मेरी wife, हम दोनों होटल स्नो पार्क मैं रहे थे. beautiful, सर, beautiful! फिर? जी फिर हमने कमरा लिया डॉक्टर साहिब, और क्या, रूम मैं गए तो… तो… सॉरी डॉक्टर, थोडा headache सा हो रहा है. जी? जी बताता हूँ, एक second, पहले पानी मिलेगा? Thank you. जी. तो हम कमरे मैं गए, और वहाँ रूम मैं कोई था – उसका छिपकली जैसा मुह था, और डॉक्टर साब हाथ केकड़े जैसे थे, और वो मेरी wife की तरफ बड़ा, मुझे कुच्छ समझ नहीं आ रहा था, और, और, मैंने butter knife उठाई और उसकी तरफ बढ़ा, और वो – और मनाली का मौसम बहुत अच्छा था, और क्या वादी – जी? जी, रूम मैं. रूम मैं. जी. तो, वो मेरी बीवी की तरफ बढ़ा, उसने अपने हाथ मेरी बीवी पे रखा , और मैं डर गया – न जाने क्या हो जाता, मैंने छुरी सीधा उसके हाथ मैं घुसा दी, नहीं!!!!! डॉक्टर साहिब, मेरे बीवी, डॉक्टर साहिब, मेरी बीवी – वो कहाँ है? dead? नो डॉक्टर, हमारी ज़िन्दगी परफेक्ट है! आप समझ नहीं रहे, परफेक्ट! वोह आदमी – hallucination? It was not a hallucination, god dammit! मैंने उसे ख़त्म कर दिया था, उसी दिन डॉक्टर साहिब, फिर मैं और मेरी wife घूमने गए थे, जी? नहीं सर, वो मरी नहीं थी डॉक्टर, कैसी बातें कर रहे हैं आप! what are you –

मेरी लाइफ परफेक्ट है, डॉक्टर साहिब. मेरी wife मुझसे बहुत प्यार करती है, हमारी बेटी दुनिया की सबसे प्यारी बच्ची है, और खुदा की रहमत से हम हर वो चीज़ afford कर सकते हैं जिसकी हमें ज़रुरत है… मुझे नहीं पता के मेरे mom-dad ने मुझे आपके पास क्यों भेजा है, पर, सच कहता हूँ डॉक्टर साहिब, I don’t need this treatment!

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अब यार मैं खूबसूरत हूँ, ठीक है पर इसका मतलब यह तो नहीं है के तुम पीछे ही पढ़ जाओ by god! “सुनिए, सुनिए, मैंने आपको कहीं देखा है!” “अरे, मैडम एक मिनट, आपसे पहले भी मुलाक़ात हो चुकी है!”

चलते चलेत आ जायेंगे, और ऊपर से नीचे तक बड़े ध्यान से देखेंगे, और यूं चुटकी बजाके बोलेंगे, “ ही डार्लिंग, हम पहले मिले हैं न?” मेरा जवाब हमेशा same होता है, “नो ‘डार्लिंग’ न पहले मिले हैं, न फिर मिलेंगे. नमस्ते! “

तो जब ये incident हुई तो काफी मज़ा आया… एक बड़ा handsome आदमी था, चौड़ा, लम्बा, cute face, जैसे होते हैं – उसको देखते देखते मुझे ऐसा लगा के अरे इसको मैं पहले मिल चुकी हूँ. तो मैं उसके पास गयी, ऊपर से नीचे तक बड़े ध्यान से देखा और same dialogue मारा,”Hi, हम पहले मिले हैं न?” उसने मुझे मेरी ही look दी, और बोला, “जी नहीं, आपको गलत फ़हमी हुयी होगी…” मेरी हसी छूट जाती, पर, और सुनो– अब तो बिलकुल कमाल ही हो रहा था by god. मुझे लगा जैसे यह पूरी की पूरी वाकये पहले हो चुकी है! मतलब, वही बन्दा, वही जगह, वही हू-ब-हू बात मैं कर चुकी हूँ. मैंने उसको बोली यह बात, तो व्हो हँसा और पतली गली से निकल लिया…

हर बार की तरह श्री श्री श्री बाबा http://www.google.com काम आये. ‘deja vu’ कहते हैं इसको. जब memory और experience, यानी यादों और अनुभव का जो विभाजन होता है, ख़त्म हो जाए, तो दिमाग को लगता है के जो हो रहा है, कभी पहले हुआ था… कंप्यूटर के सामने बैठ के मैं बहुत हसी, by god.

तो अब जब कोई नौजवान मेरे पास आके ऐसा कुछ कहता है तो मैं पकड़ लेती हूँ, भाई आजा आजा, यहाँ बैठ, हाँ इधर, आजा, अब सुन, मैं बताती हूँ की तुझे ऐसा क्यों लगा… deja vu का नाम सुना है?

वैसे आज कल लग रहा है लड़के मेरे पास थोड़े कम आने लगे हैं… ? ह्म्म्म.

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लाइफ बहुत लम्बी है मेरे दोस्त. इतनी लम्बी है के इसमें तुम 10 बार शादी कर सकते हो, 1000 बार दुनिया के चक्कर लगा सकते हो, और फिर भी टाइम निकाल के अपना जन्मदिन नंबर 80 मना सकते हो. खुल के जियो, ऐश करो, काम-शाम, ड्यूटी-शुटी सब हो जाएगा अपने टाइम से. टाइम ही तो वो चीज़ है जो अपने पास बहुत है!

मैं बीस साल से अमेरिका मैं रह रहा हूँ. हर साल इंडिया आता हूँ, घरवालों से मिलता हूँ. उस एक या दो हफ्ते मैं, मैंने घर पे शायद दो या तीन दिन से ज्यादा नहीं बिताए. अबे टाइम किसके पास है, I wanted to party man! तोह हर रोज़ दोपहर को उठता था, 12-1 बजे, लंच किया, गाडी निकाली और चल दिए. वापस आने का कोई टाइम नहीं, तो जब तक पहुँचता था, beer चढ़ा के, तो सब सो चुके होते थे… लाइफ अच्छी थी, डांटने के लिए दादीजी उठी रहती तो life would’ve been hell dude…

I was in New York when I heard. दादीजी का देहांत हो गया. मैंने अगली flight पकड़ी और घर आया. दादाजी को गुज़रे हुए तो कई साल हो चुके थे; अब दादी के बिना घर इतना खाली लग रहा था के क्या बताऊँ. जी मैं आया के एक बार, बस एक बार काश दादी आके मुझे डांट दें, बाल कटवाने के लिए कहें, फटी jeans पहनने से मन करें. बस एक बार और…

इस गलत फ़हमी मैं मत रहना के लाइफ बहुत लम्बी है… लाइफ बहुत छोटी है मेरे दोस्त. इतनी छोटी के हमें अपनों के साथ चद लम्हे ही मिल पाते हैं. उन चद लम्हों को पहचानना, और उन्हें खुल के जी पाना, यही ज़िन्दगी है.

आजकल मैं मोहब्बत कम करता हूँ, इज़हार ज्यादा. प्यार की पहली नज़र मिलती है तो लपक के पकड़ लेता हूँ, और ऐसा झूम उठता हूँ के पूछो ना. माँ को हर रोज़ फ़ोन करता हूँ; उस एक हफ्ते की छुट्टी मे मैं घर से बाहर भी नहीं निकलता. और दादी का ख़याल आते ही एक ही चीज़ सोच कर हर रोज़ सोता हूँ के यार काश आज एक बार और mom को ‘I love you’ कह दिया होता: टाइम ही तोह व्हो चीज़ है जो अपने पास बहुत कम है!