Dar Dar Ke

Atankwaadi toh chalo apna kaam kar rahe hain
Par aapne kyon dar ki dukaan lagaayi hai?
Jab dekho daraate rehte ho.

Ghar pe baithe rahoge toh rozi roti kaun kamaayega?
Par khaana baahar khaoge to pet kharaab ho jaayega.
Kadam baahar rakhe toh baarish se bachke.
Aur andar baitha raha to aalas se bachke.
Local le li toh choron se bachke
Aur gaadi le jaao toh police bachke.

Vaise bhrashtaachaar ne toh naak mein dam kar rakha hai.
Mantriyon ke haathon na ye desh hi bik jaayega.
Dange fasaad, ye scam, gareebi
Ye sookha, ye baad, ye sarkaari kaam ki dheemi raftaar –
Sab in netaaon ki buri niyat ka nateeja hai.
Hindu-Mussalman ka baer bhi inhone hi beeja hai.
Par sun, suna hai nayi sarkaar thodi… naarangi hai?
Aur, tujhe pata toh hai beta, aajkal
Bhindi kitni mehengi hai –
Toh aisa kar – khaali pet se dar.
Thodi ghoos … tu bhi kha le.
Behti Ganga toh maili ho chuki, beta
Tu bhi nahaa le.

Bhookh se dar, sarkar se dar.
Ameeron ke atyachaar se dar.
Begaari se dar. Bekaari se dar.
Hindu se dar. Muslim se dar.
Goron se dar. Kaalon se dar.
Khaana accha hai toh uske masaalon se dar.
Motaape se dar.
Mugabe se dar.
Kameenon se dar.
Haseenon se dar.
Vakeelon se dar.
Ghotaalon se dar.
Chautaalon se dar.
Kashmir mein dar. Geelani se dar.
Nani yaad aayi toh nani se dar.
Jawaani se dar. Budhaape se dar.
Chaaploosi se dar. Padosi se dar.
Gharwaalon se dar.
Sawaalon se dar.
Jawaabon se dar.
Neend aa jaaye toh khwaabon se dar.
Khwahishon se dar, aazaadi se dar.
Ghulaami se dar, aabaadi se dar.
Barbaadi se dar.
Shuruaat se dar, aur ant se bhi.
Faani se dar, anant se bhi.
Jeena toh padega, toh sun, aisa kar
Ke dar dar ke jee, aur jee bhar ke dar.

Aise hi kisi din,
Gar himmat ne saath diya
Toh dar ko bhool na jaaoon kaheen.
Ud na jaaoon kaheen.

सुनो सुनो सुनो ! आज कुछ खरा सुनाता हूँ !

Me reading this aloud:

सुनो सुनो सुनो !
आज कुछ खरा सुनाता हूँ !

कहानी ये बिलकुल सच्ची है
और सुनने में भी अच्छी है
तो कान खोलना मुफ़्त मानो,
और ध्यान इस बात पे बांधो –

ये दुनिया अब हमारी नहीं रही!
कहते हैं इंसान बड़ा बुद्धिमान है
और ये कहने वाले भी इंसान हैं
तो बात तो सच्ची होगी ही? क्यों?
फिर सवाल मैं ये उठाता हूँ  –
के जब मैं बाज़ार जाता हूँ
तो देखता हूँ सब बईमान हैं
और तुम कहते हो इंसान बुद्धिमान है!

ये दुनिया अब हम नहीं चलाते मेरे यार
चलाने वाले को मैंने देखा है
उसे छुआ है, महसूस किया है
मजबूरी में उसे याद किया है
अमीरी में उस से राज किया है

हाँ हाँ ! मैंने उसे देखा है !

तो सुनो सुनो सुनो!
आज कुछ खरा सुनाता हूँ !
सरकारें, राजा, भगवान सब त्याग कर
मैं बस अब बस पैसे को सलाम लगाता हूँ !

तेरी मेरी अहमियत अब कीमत बन चुकी है
तभी दहेज़ के  डर से बेटियां जीवनभर रोती हैं
और शादी के रिश्ते सिर्फ तब आते हैं
जब हम अपना ज़मीर नहीं, अपनी पगार बताते हैं

छोटे छोटे बच्चों के बड़े-बड़े सपनों को हम
तन्ख़्वा के तराज़ू से तोलते हैं
और सूट बूट पहने चोरों को
अब हम “बड़े साहब” बोलते हैं

क्योंकि अब कायदे कानून, जज़्बात-ओ-जूनून
सब बिक गए! सब बिक गए!
और जिसके नोटों के ढेर ऊंचे थे
वो कुर्सियों पे टिक गए!

मानते हो के बात खरी है
तो थोड़ा सर तो हिलाओ!
और जो बात झूटी लगे तो
पहली अपनी जायदात बताओ

क्योंकि समाज में अब पैसे का कुछ अजीब ही धंधा है
जो गरीब है वो गूंगा है, जो अमीर है वो अँधा है

और बचा कौन? बचा कौन दोस्तों?
बचा वो जो गरीब था
पर अभी अभी तो उसकी नौकरी लगी है
अभी अभी  घर पे
दो वक़्त की रोटी आने लगी है
अभी अभी कुछ क़र्ज़े उठने लगे हैं
अभी अभी तो वो बेड़ियां हटने लगी हैं
अभी अभी उसने माँ को नयी गाडी में घुमाया
अभी अभी तो उसने दादाजी का ऑपरेशन करवाया
अभी अभी तो उसने अपनी पहली छुट्टी ली है
अभी अभी तो उसमे दुनिया देखने की हसरतें जगी हैं
अभी अभी तो वो ज़िल्लत की बू को भूल पाया है
अभी अभी तो उसने अपना पहला घर बनाया है
और उसके इस नए बसेरे के लिए
किसने किस बस्ती को जलाया है
इस सवाल को अपने नए टीवी के चकाचौंध में
वो अभी अभी तो भूल पाया है

सुनो सुनो सुनो!
हमारी दुनिया एक सीढ़ी है –
जो नीचे वो पैरों की धुल है
और तू सोचता है ऊपर कैसा होगा
बस यही तो अंधे तेरी भूल है –
याद  रख –
सबसे ऊपर खुद पैसा होगा ।
तो करी जा तू भी संघर्ष मेरे दोस्त
तू भी कमा और तू भी लुटा
ऊपर वालों की चाट
और नीचे वालों को चटा

क्योंकि छल, कपट, झूठ, ग़द्दारी
सच,इंसाफ़, भाईचारा, और यारी
ये सभी अब बस किताबी बातें हैं
जो A.C. लगाए रहीस ही कर पाते हैं।

पर A.C. किसे नहीं चाहिए मेरे दोस्त?
वो बंगला, वो गाड़ी, वो शोहरत, वो आराम
सुकूँ भरे दिन, अयाशियों भरी शाम
हा! खुद को देख मेरी जान
बस यही तो वो नशा है जिसमे खो गया इंसान।
ये सपने, ये अरमान
सब पैसे-वालों की बदमाशी है
वर्ना तेरे-मेरे लिए तो
दो वक़्त की रोटी भी काफ़ी है
और हम जैसे नशेड़ियों से बेहतर तो वो है
जिसके घर में ना TV, ना रेडियो-अखबार है
तू देख, आँखें खोल
दुनिया सपनों का बाज़ार  है
तेरी आँखों में जो चमक है वो
किसी और का कारोबार है

तो खरीद मेरी जान खरीद !
और खरीद-पाने के लिए
घसीट मेरी जान घसीट!
office से दूकान तक की दूरी
बस छे मिनट में पूरी कर पाएगा
कुछ मज़ेदार-सा खरीदने के हक़ के बदले
तू अपनी इंसानियत बेच आएगा।

सुनो सुनो सुनो – मैं बात खरी सुनाता हूँ !
जो जैसा है, वो वैसा ही बताता हूँ
इस रोटी कपड़े मकान के पीछे
ना जाने कितने शहीद हुए
कितने संत गरीब रहे
और कितने क़ातिल अमीर हुए

पर मौका है! अब भी मौका है तेरे पास!
हिम्मत हो तो सुन
अपनी आँखें बंद कर
और अपने सपने खुद बन
पैसे नहीं दोस्त कमाने की सोच
गाड़ी नहीं, रिश्ते चलाने की सोच!
अरे मैं कहता हूँ इस पैसे को जाने दो!
हमें लड़ने के नहीं, साथ रहने के बहाने दो
क्योंकि जीने के लिए मुझे
ना रोटी, ना कपड़ा, ना मकान चाहिए
मुझे तो बस इंसान चाहिए
मुझे तो बस इंसान चाहिए

बस इक पल के लिए

थम जाए अगर ये दुनिया
बस इक पल के लिए,
थोड़ा सा चैन छीन लूँ
बस इक पल के लिए।

ज़िन्दगी का नाम रफ़्तार है
ख़्वाबों का बाज़ार है
खरीदे सपने बेच दूँ
बस इक पल के लिए।

चस्का है कुछ कर जाने का
वादा-ए-तक़दीर निभाने का
अपनी तक़दीर देख लूँ
बस इक पल के लिए।

सुनहरे सपने बीजे हैं
डर की सलाखों के पीछे से
हौंसले की चाबी ढूँढ लूँ
बस इक पल के लिए।

Aaj Sab Theek Hai – New Song About Blaming it on the Ooparwaala

Here’s a little song I wrote,
You might want to sing it note for note,
Don’t worry,
And blame it on,
The ooparwaala.

Lyrics

Verse:
Mandir ho ya Masjid,
Church ya gurudwara,
Ya phir sheesh mahal mein baitha
Dashing boss tumhaara
Ooparwaala hai har kaheen
Aasmaan woh, hum zameen.
Toh baadal kaheen bhi chhaayein
Baarish humi pe girti hai
Kyonki aakhir mein toh bas
Ooparwaale ki chalti hai!

Chorus:
Toh,
Aaj sab theek hai
Shukar ooparwaale ka!
Kal jo bigad gaya toh
Galti bhi ooparwaale ki!

Kavita:
Jiya jo pal pal zindagi ki
Saari rasmein nibhaayi,
Time pe padhaai, davaai,
Lugaai aur duhaai.
Ooparwaala sadistic hai,
Kucch aisi duniya banaayi
Ke har ek jeete pal pe daali
Kabr ki hai parchhaai.

English Translation

Verse:
Whether it’s in a temple, a mosque,
A church or a gurudwara,
Or, sitting in a beautiful house of glass,
It’s your dashing boss,
The “ooparwaala” is everywhere
They are the sky, and we are the dust
So nomatter where the clouds end up
We will have to bear the rain
Because nomatter what, eventually,
“Ooparwaala” gets his way.

Chorus:
So,
Today if everything is fine,
Thank the “ooparwaala”!
An if tomorrow everything goes wrong,
It’s also the fault of “ooparwaala”!

Poem:
As I lived the moments of my life,
I followed all the unspoken rules,
I studied, kept my health,
Married and mourned, all at the right times.
But this “ooparwaala” is sadistic,
He’s put us in such a world –
That every living moment is darkened
By the shadow of the grave.

Baniyaan – An Original Song.

Hello doston,

Here’s a new dance song about vests. Not joking.

I absolutely love Anwar Masood saab’s poems, even if I don’t always understand them 100%.

This is my dedication to him – thank you for making such beautiful poetry. This is what rap from the subcontinent should be like – simple, insightful, human truths, with an effervescent humour.

You are my inspiration, sir! I hope this finds it’s way to him somehow, and he doesn’t immediately hate me. 🙂 I’ve tried my best.

Will make a video at some point as well.

For now, enjoy, Baniyan, by Anwar Masood.

Rap lyrics by Anwar Masood. Chorus by Shiv Tandan.

Special thanks: Maanavi Panwar, Sukrit Singh Raghuvanshi, Mohit Surana – for being my consultants and listening to this so many times. Also, thank you Clarilyn Khoo! 😀