Ode to Mumbai – 1 – Monster

A monster’s heart is beating it alive
This city’s stench and bile is still aglow.
And you and I are dregs of mindless dust
Just wafting thoughts that pass, and are forgot.

“City of Gold”, they say with silver eyes
Gold – for rich and poor and middle class
Gold – to film, to sing, to act, to sell.
Gold – beneath the monsoon’s weary roof
Gold – among forgotten shanty cracks
Gold – embalmed in casks of broken bones
Gold – still owed to prowling, hungry hawks
Who nest too high and cannot see the ground.

In this parade I find myself spectating
My bag chock-full of dreams and hopes in waiting.

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बस इक पल के लिए

थम जाए अगर ये दुनिया
बस इक पल के लिए,
थोड़ा सा चैन छीन लूँ
बस इक पल के लिए।

ज़िन्दगी का नाम रफ़्तार है
ख़्वाबों का बाज़ार है
खरीदे सपने बेच दूँ
बस इक पल के लिए।

चस्का है कुछ कर जाने का
वादा-ए-तक़दीर निभाने का
अपनी तक़दीर देख लूँ
बस इक पल के लिए।

सुनहरे सपने बीजे हैं
डर की सलाखों के पीछे से
हौंसले की चाबी ढूँढ लूँ
बस इक पल के लिए।

ख्व़ाब

ऊंचा इक पहाड़

खाई गहरी
तेज़ हवाएं
जलते ख़्वाबों की बू
दूर एक ढलते सूरज से
आँखों में धुआं
नज़रें मदहोश
कंप-कंपाते घुटने
पसीने की अकेली टपकती बूँद
बिजली सी
छाती पर रेंगती
दिल छोटा । मुरमुरा ।
मुंह खुला पर
आवाज़ नहीं ।
जुबां पर कुच्छ मचलते अलफ़ाज़ पर
आवाज़ नहीं ।
वोह खाई गूँज उठती मगर
आवाज़ नहीं ।
तो बहरहाल
कूदने की बजाये
आँखों से कुच्छ बूँदें अदा हुईं
घुटने ढय गए ।
रेत और पत्थरों के बीच
थोड़ी जगह बनाकर
वहीं, स्थिर रह गए ।
मुंह अब भी खुला – बहुत प्यास।
कितनी आशाएँ ।
मेरे गाल से एक नमकीन बूँद
जब तक सिमटकर
रेत तक पहुँचती
सामने आकाश बुझ गया
सूरज डूब गया।
मैं कूदा नहीं ।

सूर्यास्त

ऊंचा इक पहाड़ 

खाई गहरी 
तेज़ हवाएं 
जलते ख़्वाबों की बू 
दूर इक ढलते सूरज से 
आँखों में धुआं 
नज़रें नशीली 
कांपते घुटने 
पसीने की अकेली रेंगती बूँद 
बिजली सी 
छाती पे 
दिल छोटा। मुरमुरा। 
मुह खुला पर 
आवाज़ नहीं। 
जुबां पे कुच्छ मचलते लफ्ज़ पर 
आवाज़ नहीं। 
वो खाई गूँज उठती मगर 
आवाज़ नहीं।
तोह बहरहाल,
कूदने के बदले 
आँखों से कुच्छ बूँदें ऐडा हुई 
घुटने ढय गए 
कंकरों और मिटटी से कहकर 
ज़मीन पर।
मुह अब भी खुला।
पानी, बहुत प्यास 
कितनी आशाएं 
मेरे गाल से एक आंसू 
जब तक रेट तक पहुँचता 
सामने सूरज डूब गया।
और मैं,
मैं कूदा नहीं।