Rahi Tham Jaa Zara

डगमगा रहे कदम
दिल की धड़कनें भी यूँ
है समा भी झूम रहा

सर है भारी सा कभी
पैरों में जहाँ कभी
कुछ समझ नहीं आ रहा

दो ही पल का साथ है
सीधी सीधी बात है
रोक ले ज़रा यहीं कदम ।

राही थम जा ज़रा
वक़्त है यहाँ बड़ा
देरी ही तो है तेरा धरम।

इतनी दूर आ गए के
जो भी ख्वाब थे
वो खो गए, हाँ खो गए

ऐसी बेहोशी है के
बस खुदी में हम
खो गए, हाँ खो गए

पर ये तेरे खुल खुल जाएँ
बन जा रे बंजारा
खुद पे काबू डुल डुल जाए
तेरा घर गलियारा

मंज़िलों की चाल है
80-90 साल हैं
छोड़ो साले क्यों करें सफ़र

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बस इक पल के लिए

थम जाए अगर ये दुनिया
बस इक पल के लिए,
थोड़ा सा चैन छीन लूँ
बस इक पल के लिए।

ज़िन्दगी का नाम रफ़्तार है
ख़्वाबों का बाज़ार है
खरीदे सपने बेच दूँ
बस इक पल के लिए।

चस्का है कुछ कर जाने का
वादा-ए-तक़दीर निभाने का
अपनी तक़दीर देख लूँ
बस इक पल के लिए।

सुनहरे सपने बीजे हैं
डर की सलाखों के पीछे से
हौंसले की चाबी ढूँढ लूँ
बस इक पल के लिए।

Ye Dhun Gungunaana

Jab dhundhli ho raahein saari
Ghadi ke kaante pad jaayein bhaari
Jab mann aur manzil ke beech mein
Aa jaaye duniyadaari

Toh ye dhun gungunaana
Chintaayein bhool jaana
Yahi hai khushiyaan paane ka
Ek aasaan bahaana.

Asamanjas mein kyon padna,
Jab aage hi hai badna
Toh aaj nahi toh kal
Niklega koi hal

Bas tab tak –
Ye dhun gungunaana
Chintaayein bhool jaana
Yahi hai khushiyaan paane ka
Ek aasaan bahaana.

मुज्ज़फर्नगर के दंगे

टीवी पर न्यूज़ देखी तो दंग रह गये। 
दरअसल जिन से हम मुहब्बत करते हैं
उनका मुज़फ्फरनगर से तालुक़ है,
तो ज़ाहिर है कि सबसे पेहले
उन्ही को फ़ोन किया।

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